3 अगस्त 2026 का पंचांग: हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व माना जाता है। शुभ कार्य, यात्रा, निवेश, विवाह या पूजा-पाठ जैसे मांगलिक कार्यों से पहले पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का विचार किया जाता है। पंचांग हिंदू कालगणना की वह पद्धति है, जो सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की चाल पर आधारित होती है।
3 अगस्त 2026, सोमवार को श्रावण (सावन) मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि रात 10:54 बजे तक रहेगी। इसके बाद षष्ठी तिथि आरंभ हो जाएगी। यह सावन का पहला सोमवार भी है, जिसे भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की विधि-विधान से पूजा करने पर विशेष पुण्य और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है।
क्या चढ़ाएं शिवलिंग पर
शिवलिंग पर जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करने के साथ बेलपत्र, धतूरा, सफेद पुष्प और चंदन अर्पित करना शुभ माना गया है।
इस दिन सूर्योदय सुबह 6:02 बजे और सूर्यास्त शाम 7:03 बजे होगा। वहीं चंद्रोदय रात 9:59 बजे तथा चंद्रास्त अगले दिन सुबह 10:54 बजे होगा। पंचांग के अनुसार, सूर्य पूरे दिन पुष्य नक्षत्र में रहेगा। चंद्रमा रात 10:00 बजे तक उत्तर भाद्रपदा नक्षत्र में रहेगा, जिसके बाद रेवती नक्षत्र का आरंभ होगा।
योग की बात करें तो इस दिन सुकर्म योग रहेगा, जिसे शुभ कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:07 बजे से 12:59 बजे तक रहेगा। यह दिन का सबसे शुभ मुहूर्त माना जाता है। वहीं अमृत काल शाम 5:07 बजे से 6:44 बजे तक रहेगा।
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यह रहेगा अशुभ समय
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल सुबह 7:40 बजे से 9:17 बजे तक रहेगा। यमगंड काल सुबह 10:55 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक और गुलिक काल दोपहर 2:10 बजे से 3:48 बजे तक रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचना चाहिए।
ग्रहों की स्थिति के अनुसार, इस दिन सूर्य कर्क राशि में और चंद्रमा मीन राशि में रहेगा। सोमवार को पूर्व दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा करना आवश्यक हो, तो प्रस्थान से पहले पारंपरिक ज्योतिषीय उपाय करने की सलाह दी जाती है।

