वाराणसी। वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बुधवार सुबह नदी का पानी 67.58 मीटर तक पहुंच गया। जलस्तर में करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ोतरी जारी है। पानी बढ़ने के साथ ही काशी के कई गंगा घाटों के बीच संपर्क टूट गया है। मणिकर्णिका घाट तक पानी पहुंच गया है, जबकि हरिश्चंद्र घाट पर सीढ़ियों के ऊपर अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है। तटवर्ती और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता भी बढ़ गई है।
बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने 46 राहत शिविरों को अलर्ट कर दिया है। घाटों और तटवर्ती इलाकों में जलपुलिस तथा एनडीआरएफ की टीमें लगातार निगरानी और गश्त कर रही हैं। लोगों से गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नदी और घाटों के निचले हिस्सों से दूर रहने की अपील की जा रही है।
मणिकर्णिका घाट तक पहुंचा पानी
गंगा का पानी बढ़ने के साथ मणिकर्णिका घाट पर भी स्थिति बदल गई है। घाट की सीढ़ियों तक पानी पहुंच चुका है। वहीं हरिश्चंद्र घाट पर सीढ़ियों के ऊपर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। घाटों के बीच आने-जाने वाले रास्ते पानी में डूबने से उनका आपसी संपर्क प्रभावित हुआ है।
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार रात 8 बजे गंगा का जलस्तर 67.22 मीटर था। इसके बाद बुधवार सुबह तक इसमें लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि उस समय नदी का जलस्तर चेतावनी बिंदु से करीब साढ़े तीन मीटर और खतरे के निशान से लगभग चार मीटर नीचे था।
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अगले 36 घंटे अहम
प्रयागराज में गंगा का जलस्तर स्थिर होने के बाद वाराणसी में भी अगले 36 घंटे में पानी बढ़ने की रफ्तार थमने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि स्थिति पूरी तरह मौसम और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश पर निर्भर करेगी।
अगर तेज बारिश नहीं हुई और आसपास के राज्यों से गंगा-यमुना में अतिरिक्त पानी नहीं आया तो वाराणसी में जलस्तर स्थिर हो सकता है। फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार नदी के जलस्तर पर नजर रख रहे हैं।
वरुणा किनारे के इलाकों में भी बढ़ी चिंता
गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वरुणा नदी के किनारे बसे इलाकों पर भी पड़ने की आशंका है। निचले क्षेत्रों में संभावित जलभराव और बाढ़ के खतरे को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी गई है। प्रशासन ने राहत और बचाव से जुड़ी तैयारियां भी सक्रिय कर दी हैं।
गंगा के बढ़ते पानी के बीच चिरईगांव के ढाब क्षेत्र में कटान भी शुरू हो गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि अगर जलस्तर इसी रफ्तार से बढ़ता रहा तो बुधवार रात या गुरुवार सुबह तक आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों में सब्जियों की खड़ी फसलें पानी में डूब सकती हैं।
फसलों के डूबने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों में दूध उत्पादन पर भी इसका असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है।
46 राहत शिविर अलर्ट, बचाव दल तैयार
बाढ़ की आशंका को देखते हुए जिला प्रशासन ने 46 राहत शिविरों को अलर्ट मोड पर रखा है। जरूरत पड़ने पर तटवर्ती और प्रभावित इलाकों के लोगों को इन शिविरों में पहुंचाया जा सकेगा। राहत सामग्री, बचाव दल और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता की भी निगरानी की जा रही है।
गंगा में बढ़ते पानी को देखते हुए NDRF और जलपुलिस की टीमें घाटों और तटवर्ती इलाकों में लगातार गश्त कर रही हैं। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई गई है। श्रद्धालुओं और पर्यटकों से नदी के करीब नहीं जाने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करने की अपील की जा रही है।
नमो घाट का ‘काशी वंदन’ कार्यक्रम स्थगित
बढ़ते जलस्तर का असर काशी के सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर भी पड़ा है। स्थिति को देखते हुए नमो घाट पर होने वाला दैनिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘काशी वंदन’ स्थगित कर दिया गया है।
फिलहाल वाराणसी में गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ता पानी घाटों और तटवर्ती इलाकों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। प्रशासन की नजर अब अगले 24 से 36 घंटों में जलस्तर और मौसम की स्थिति पर है।










