8th pay commission: सैलरी में हो सकता है 68% तक इजाफा, और क्या बातें आई सामने?

8th pay commission:केंद्र सरकार के कर्मचारी आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। भले ही औपचारिक सिफारिशें आने में अभी करीब एक साल का वक्त बाकी है, फिर भी कर्मचारी वर्ग संभावित फिटमेंट फॉर्मूले के आधार पर अपनी नई सैलरी और भत्तों का हिसाब-किताब लगाने में जुटा है।

केंद्रीय कर्मचारियों की प्रमुख संस्था नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने आठवें वेतन आयोग से 3.833 का फिटमेंट फैक्टर मांगा है, हालांकि विशेषज्ञों की राय है कि यह मांग व्यावहारिक रूप से अधिक है और असल में आयोग 2.0 से 2.25 के बीच का आंकड़ा तय कर सकता है। इस अनिश्चितता के बावजूद, देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर उनकी जेब में कितना इजाफा होने वाला है।

8th pay commission: क्या ज्यादा फिटमेंट फैक्टर का मतलब है उतनी ही ज्यादा सैलरी बढ़ोतरी?

यहां एक दिलचस्प बात सामने आती है — आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर का बढ़ना जरूरी नहीं कि सैलरी में उसी अनुपात में इज़ाफे की गारंटी दे। इतिहास पर नजर डालें तो सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 होने के बावजूद ग्रास सैलरी में महज 14.29% की वृद्धि दर्ज हुई थी। इसके उलट, छठे वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सिर्फ 1.86 था, फिर भी सैलरी में 54% तक उछाल आया।

चौथे और पांचवें वेतन आयोग में यह बढ़ोतरी क्रमशः 27.60% और 31% रही थी। यही वजह है कि विशेषज्ञ बार-बार आगाह कर रहे हैं कि आठवें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर के आंकड़े को अकेले देखकर सैलरी बढ़ोतरी का अंदाजा लगाना जल्दबाजी होगी। असल तस्वीर तभी साफ होगी जब पूरा फॉर्मूला और उसके साथ जुड़े अन्य घटक सामने आएंगे।

8th pay commission: लेवल 1-18 तक के कर्मचारियों को कितना फायदा?

बैंकबाजार के आकलन के मुताबिक, अगर आठवां वेतन आयोग 2.0 से 2.57 के दायरे में फिटमेंट फैक्टर तय करता है, तो लेवल 1 से लेवल 18 तक के कर्मचारियों की ग्रास सैलरी में 31% से लेकर 68% तक की बढ़ोतरी संभव है।

गौरतलब है कि पिछले वेतन आयोगों के आंकड़ों में सबसे बड़ा उछाल छठे वेतन आयोग (54%) में देखा गया था, जबकि सबसे कम बढ़ोतरी सातवें वेतन आयोग (14.29%) में हुई थी। इस लिहाज से आठवें वेतन आयोग से यह उम्मीद की जा रही है कि यह बढ़ोतरी बीच के दायरे में कहीं टिक सकती है, हालांकि निचले और ऊपरी स्तर के कर्मचारियों के लिए यह प्रतिशत अलग-अलग हो सकता है। जूनियर स्तर के कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक सैलरी में बदलाव खास तौर पर अहम होगा, क्योंकि इसी आधार पर उनके भत्ते और भविष्य की वेतन वृद्धि तय होती है।

8th pay commission: कम फिटमेंट फैक्टर पर भी ज्यादा फायदा कैसे मुमकिन?

सवाल उठता है कि आठवें वेतन आयोग में ज्यादा फिटमेंट फैक्टर के बावजूद सैलरी में बढ़ोतरी कम क्यों रह जाती है। इसका जवाब मौजूदा महंगाई भत्ते (DA) की दर में छिपा है, जो इस पूरे गणित में अहम भूमिका निभाती है। दरअसल केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन ढांचे में बेसिक सैलरी, DA, HRA और TPTA जैसे घटक तो लगभग तय पैटर्न पर चलते हैं, लेकिन बाकी भत्ते कर्मचारी के काम की प्रकृति, पद, जोखिम स्तर और तैनाती की जगह के हिसाब से अलग-अलग होते हैं। जब किसी वेतन आयोग के लागू होने के समय DA पहले से ही ऊंचे स्तर पर होता है, तो नई बेसिक सैलरी में उसका एक हिस्सा पहले ही समाहित हो चुका होता है, जिससे कुल बढ़ोतरी का आंकड़ा फिटमेंट फैक्टर जितना बड़ा नहीं दिखता। आठवें वेतन आयोग के लागू होने के वक्त DA का स्तर क्या होगा, यह भी अंतिम बढ़ोतरी तय करने में एक निर्णायक कारक साबित होगा।

8th pay commission का पिछले साल हुआ था गठन, अब जारी है परामर्श प्रक्रिया

फिलहाल सबकी निगाहें आठवें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों पर टिकी हैं। सरकार ने बीते साल नवंबर में इस आयोग का गठन किया था, और यह 2026 में सक्रिय रूप से काम करना शुरू कर चुका है। इस साल की पहली छमाही में आठवें वेतन आयोग का पोर्टल लॉन्च किया जा चुका है, साथ ही देशभर में कर्मचारी संगठनों और अन्य हितधारकों के साथ बैठकों का सिलसिला भी जारी है। इन बैठकों के जरिए आयोग विभिन्न कर्मचारी संघों, पेंशनभोगी संगठनों और विशेषज्ञों के सुझाव इकट्ठा कर रहा है, ताकि अंतिम सिफारिशें तैयार करते वक्त सभी पक्षों की चिंताओं को ध्यान में रखा जा सके। उम्मीद जताई जा रही है कि आठवें वेतन आयोग की रिपोर्ट आने के बाद केंद्र सरकार इसे लागू करने से पहले वित्तीय बोझ और बाजार पर पड़ने वाले असर का भी आकलन करेगी, जिससे यह साफ हो सके कि आखिरी फैसला किस रूप में सामने आता है।

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मयंक शेखर

मैं मीडिया इंडस्ट्री से पिछले 7 सालों से जुड़ा हूं। नेशनल, स्पोर्ट्स और सिनेमा में गहरी रूचि। गाने सुनना, घूमना और किताबें पढ़ने का शौक है।

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