सपा के साथ गठबंधन पर क्या बोले ओवैसी?
उत्तर प्रदेश में सपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने के सवाल पर ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी पहले से ही विपक्षी दलों से मिलकर चुनाव लड़ने की अपील कर रही है। उन्होंने कहा, “हमने कहा है कि आप मिलकर लड़िए तो हम भाजपा को तीसरी बार रोक पाएंगे।”
इस दौरान उन्होंने बिहार का उदाहरण देते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर भी निशाना साधा। ओवैसी ने कहा कि बिहार में भी उनकी पार्टी ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने दावा किया कि एआईएमआईएम ने राजद को पत्र लिखकर छह सीटें देने की मांग की थी, लेकिन इसे स्वीकार नहीं किया गया।
ओवैसी ने कहा, “आप अपनी पार्टी चलाइए, हमारी पार्टी हम चलाएंगे।” हालांकि, उत्तर प्रदेश में एआईएमआईएम के संभावित गठबंधन में कौन-कौन से दल शामिल होंगे और सीटों के बंटवारे का क्या फार्मूला होगा, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
‘एक समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है’
उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समुदाय की स्थिति को लेकर ओवैसी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने सहारनपुर की एक मस्जिद के खिलाफ हुई कार्रवाई और करीब 100 साल पुराने कब्रिस्तान से जुड़े मामले का उल्लेख किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि झूठे एनकाउंटर में लोगों को मारा जा रहा है। ओवैसी ने लखनऊ में परवेज नाम के एक व्यक्ति की कथित मॉब लिंचिंग का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “एक समुदाय को टारगेट किया जा रहा है। यही सबसे बड़ा मुद्दा है।”
ओवैसी के इन आरोपों पर संबंधित मामलों में प्रशासन और पुलिस का पक्ष अलग हो सकता है। उनके बयानों को फिलहाल राजनीतिक आरोपों के तौर पर देखा जा रहा है।
‘भारतीय राजनीति की लैला हैं हम’
समाजवादी पार्टी के ‘वाई’ और भाजपा के ‘टी’ यानी यादव और ठाकुर समीकरण से जुड़े सवाल पर ओवैसी ने कहा, “जब सपा होती है तो वाई महत्वपूर्ण हो जाता है और भाजपा में तो टी ही इंपॉर्टेंट है।”
‘आई लव मोहम्मद’ से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि यह उनके विश्वास का हिस्सा है।
महिला मतदाताओं के समर्थन से जुड़े सवाल पर ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी चुनाव लड़ेगी, लेकिन उन्हें सभी का साथ चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने कहा, “भारतीय राजनीति की हम तो लैला हैं, हमें सब चाहते हैं।”
2017 से यूपी में खाता नहीं खोल सकी एआईएमआईएम
उत्तर प्रदेश में एआईएमआईएम अब तक विधानसभा चुनाव में कोई सीट नहीं जीत सकी है। पार्टी ने 2017 के विधानसभा चुनाव में 38 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं हुई।
2022 के विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम ने करीब 95 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में भी पार्टी का कोई उम्मीदवार विधानसभा नहीं पहुंच सका। इस तरह 2017 और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को मिलाकर एआईएमआईएम ने अब तक एक भी सीट नहीं जीती है।
2022 के चुनाव से पहले ओवैसी की पार्टी ने ‘भागीदारी परिवर्तन मोर्चा’ के जरिए कई छोटे दलों को साथ लाने की कोशिश की थी। पार्टी की बातचीत कुछ क्षेत्रीय दलों के साथ हुई, लेकिन यह प्रयास किसी बड़े चुनावी गठबंधन में तब्दील नहीं हो सका।
अब 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए एआईएमआईएम उत्तर प्रदेश में अपना संगठन मजबूत करने और मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाने पर जोर दे रही है। ओवैसी की 2 अक्टूबर की समयसीमा के बाद पार्टी की चुनावी रणनीति और संभावित गठबंधन को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।










