Ghazipur News: गाजीपुर जिले के करंडा थाना क्षेत्र स्थित कटरिया गांव में 15 अप्रैल को हुई किशोरी निशा विश्वकर्मा की संदिग्ध मौत का मामला अब एक बड़े राजनीतिक टकराव में बदल गया है। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का 29 अप्रैल को प्रस्तावित गाजीपुर दौरा फिलहाल टल गया है। पार्टी द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र (पत्रांक 66(1)) में स्पष्ट किया गया है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
समाजवादी पार्टी द्वारा जारी ‘तत्काल’ पत्र के अनुसार, अखिलेश यादव को 29 अप्रैल को दोपहर 1:00 बजे पीड़ित परिवार से मिलने कटरिया गांव पहुंचना था। हालांकि, पत्र में आगे कहा गया है, “जिला गाजीपुर, उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था सामान्य होने पर पीड़ित परिवार से मिलने का कार्यक्रम बाद में निर्धारित किया जाएगा।”

यह पत्र अपर पुलिस महानिदेशक (सुरक्षा), गाजीपुर के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी प्रेषित किया गया है। गौरतलब है कि जिला प्रशासन ने पहले ही तनाव को देखते हुए जिले में बीएनएस धारा 163 (पूर्व में धारा 144) लागू कर दी है, जो 30 अप्रैल तक प्रभावी रहेगी।
पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की मदद
अखिलेश यादव ने एक फेसबुक पोस्ट में इस बात की जानकारी दी कि पीडीए समाज की तरह से पीड़ित परिवार को 5 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई है। उन्होंने लिखा, गाजीपुर के पीड़ित परिवार को हमारे पूरे पीडीए समाज ने मिलकर, एक समुदाय के रूप में 5 लाख रुपये एकत्र कर, इस कठिन घड़ी में अपने प्रतिनिधि मंडल के माध्यम से जो मदद की है, वो दरअसल पीडीए की एकता का प्रतीक है।
दौरा टलने के बावजूद अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने हाथरस कांड का हवाला देते हुए इसे ‘गाजीपुर की बेटी हत्याकांड’ करार दिया। अखिलेश ने आरोप लगाया कि प्रशासन पीड़ितों पर दबाव डालकर बयान बदलवाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “उत्तर प्रदेश ने इतना कमजोर मुख्यमंत्री कभी नहीं देखा, जो बेबस पीड़ितों पर दबाव डलवाते हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट कुछ भी कहे, जमीनी सच्चाई गांव के हर घर को पता है।”
संगीता बलवंत ने सीएम योगी का लिखा था पत्र
दूसरी ओर, बीजेपी की राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने सपा पर माहौल बिगाड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर आशंका जताई थी कि सपा के दौरों से हिंसा भड़क सकती है। डॉ. बलवंत ने कहा, “जब सपा का प्रतिनिधिमंडल गांव पहुंचा, तभी पथराव जैसी घटनाएं हुईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण डूबना बताया गया है और परिवार कार्रवाई से संतुष्ट है, लेकिन विपक्ष जानबूझकर इस संवेदनशील मामले का राजनीतिकरण कर रहा है।”
क्या है पूरा विवाद?
विवाद की मुख्य वजह 15 अप्रैल को कटरिया गांव में किशोरी निशा विश्वकर्मा की हुई मौत है, जिसे लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के दावे पूरी तरह अलग हैं। समाजवादी पार्टी इसे एक सुनियोजित हत्याकांड करार दे रही है और उसका आरोप है कि सरकार ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) परिवार को निशाना बना रही है।
दूसरी ओर, बीजेपी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया है कि मौत डूबने के कारण हुई है और विपक्ष केवल राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहा है। फिलहाल, इस राजनीतिक खींचतान और हालिया झड़पों को देखते हुए जिले में भारी पुलिस बल तैनात है और प्रशासन ने 30 अप्रैल तक किसी भी तरह के राजनीतिक जमावड़े पर रोक लगा दी है।









